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1. कच्चे आम धोएँ और अच्छी तरह सुखाएँ: पानी अचार का दुश्मन है, इसलिए सारे बर्तन पूरी तरह सूखे होने चाहिए। छिलके और गुठली समेत लगभग 2 सेमी के टुकड़ों में काटें और गुठली का सख़्त हिस्सा फेंक दें।
2. एक कटोरे में आम के टुकड़ों को नमक और हल्दी के साथ मिलाएँ और ढककर एक दिन फ़्रिज में रखें। अगले दिन उनका छोड़ा पानी फेंक दें और टुकड़ों को साफ़ पेपर टॉवल से अच्छी तरह सुखा लें।
3. राई, मेथी दाना और सौंफ सूखे पैन में 1–2 मिनट भूनें, जब तक ख़ुशबू न आने लगे; फिर ठंडा होने दें और खरल में मोटा-मोटा कूटें।
4. खाने योग्य और खाद्य पदार्थ के रूप में बेचा जाने वाला सरसों का तेल लें। लेबल के अनुसार गरम करें, पर धुआँ न उठने दें; फिर आँच से उतारें और गुनगुना होने दें। कलौंजी, हींग, लाल मिर्च पाउडर और कुटे मसाले मिलाएँ।
5. आम के टुकड़ों को मसालेदार तेल के साथ अच्छी तरह मिलाएँ और एक साफ़ और सूखे काँच के जार में इस तरह भरें कि तेल उन्हें ढक दे।
6. बंद करें, तुरंत फ़्रिज में रखें और एक रात स्वाद मिलने दें। दो दिनों के भीतर खा लें; यह पारंपरिक संरक्षित अचार का ताज़ा, फ़्रिज वाला संस्करण है। हर भोजन में थोड़ी मात्रा में चावल, दाल और पराठे के साथ परोसें।
सुझाव: भारत में लगभग हर परिवार की अचार की अपनी विधि होती है, जो गर्मियों में कच्चे आम के मौसम में बनाई जाती है। अगर सरसों का तेल न मिले, तो किसी सादे तेल से भी बना सकते हैं, पर तब विशिष्ट तीखा और तेज़ स्वाद हल्का हो जाता है।
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