1. आटे को नमक के साथ एक कटोरे में डालें और चलाते हुए धीरे-धीरे गुनगुना पानी डालें, जब तक नरम और थोड़ा चिपचिपा आटा न बन जाए।
2. 8–10 मिनट गूँधें, जब तक चिकना और लचीला न हो जाए, और फिर ढककर 30 मिनट रखें: इस तरह बेलना आसान होता है और चपाती ज़्यादा नरम बनती है।
3. आटे की 8 लोइयाँ बनाएँ। हर एक को सूखा आटा लगी सतह पर 15–18 सेमी की पतली गोल रोटी में बेलें, बार-बार घुमाते हुए ताकि गोल और एक-समान बने।
4. तवा मध्यम-तेज़ आँच पर गरम करें, रोटी रखें और जब नीचे छोटे बुलबुले दिखें (लगभग 30 सेकंड), पलटें।
5. दूसरी तरफ़ 30–40 सेकंड सेंकें और फिर चिमटे से सीधे चूल्हे की लौ पर रखें, जहाँ कुछ ही सेकंड में यह गुब्बारे की तरह फूल जाएगी (गैस की लौ न हो, तो तवे पर मोड़े हुए कपड़े से दबाएँ)।
6. गरम रहते ही थोड़ा घी लगाएँ और बाकी बनाते समय कपड़े में लपेटकर गरम रखें।
सुझाव: यह उत्तर भारत के घरों की रोज़ की रोटी है, जिससे चम्मच की जगह सब्ज़ी और दाल „तोड़कर” खाई जाती है। बहुत बारीक पिसा गेहूँ का आटा इसे नरम बनाता है; अगर बस मोटा पिसा आटा मिले, तो उसे बराबर मात्रा में साधारण मैदे के साथ मिलाएँ।
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