1. एक रात पहले काबुली चने भरपूर पानी में भिगोएँ और अगले दिन नरम होने तक उबालें (लगभग 45 मिनट)। आलू छिलके समेत उबालें, छीलें और छोटे क्यूब्स में काटें। दोनों मिलाएँ और चाट मसाला और नमक छिड़कें।
2. पानी के लिए पुदीना, धनिया, हरी मिर्च और थोड़ा पानी ब्लेंडर में चिकना होने तक पीसें। बचा ठंडा पानी, इमली का पेस्ट, सूखा भुना और पिसा जीरा, चाट मसाला और नमक मिलाएँ। छानें और कम से कम 1 घंटा फ़्रिज में रखें।
3. पूरियों के लिए सूजी, मैदा और नमक थोड़े पानी के साथ सख़्त आटा बनने तक गूँधें और ढककर 20 मिनट रखें। 2 मिमी पतला बेलें और 5 सेमी के कटर से गोल टुकड़े काटें। टुकड़े गीले कपड़े के नीचे रखें, ताकि सूखें नहीं।
4. एक छोटी, गहरी कड़ाही में तेल गरम करें और एक बार में 4–5 टुकड़े डालें। झरनी से हल्का दबाएँ, जब तक फूल न जाएँ, फिर पलटें और कुरकुरी और सुनहरी पूरियाँ बनने तक तलें। किचन पेपर पर निकालें और पूरी तरह ठंडा होने दें।
5. परोसते समय अँगूठे से पूरियों के ऊपरी हिस्से में छेद करें और हर एक में एक छोटा चम्मच भरावन रखें।
6. खाने से ठीक पहले हर पूरी ठंडे पानी में डुबोएँ और पूरी की पूरी मुँह में रखें।
सुझाव: यह मुंबई का पसंदीदा स्ट्रीट फ़ूड है, जिसे कोलकाता में „पुचका” और दिल्ली में „गोलगप्पा” कहते हैं। पूरी एक ही कौर में खानी चाहिए, क्योंकि पानी उसे गीला कर देता है: असली बात है यह कुरकुरा, तीखा और ठंडा „धमाका”। पूरियाँ भारतीय दुकानों में तैयार भी मिलती हैं।
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