1. ऑक्टोपस को (पहले फ़्रीज़ करके पिघलाया हो तो बेहतर, क्योंकि वह ज़्यादा नरम होता है) आधे कटे प्याज़ और तेज पत्ते के साथ एक बड़े बर्तन में, बिना पानी और ढककर रखें; धीमी आँच पर अपने ही रस में 45–60 मिनट पकाएँ, जब तक टेंटेकल में कांटा आसानी से न घुस जाए।
2. इस बीच छोटे आलू धोएँ, छिलके समेत मोटे नमक में लपेटें और 200 °C पर ओवन में 35–40 मिनट नरम होने तक बेक करें।
3. नरम आलुओं को हथेली से (या गिलास के तले से) सावधानी से दबाएँ, ताकि छिलका खुल जाए: इस तरह वे „मुक्का मारे आलू” बन जाते हैं।
4. ऑक्टोपस निथारें, टेंटेकल अलग करें और आलुओं के साथ बेकिंग ट्रे में रखें; लहसुन को पतले टुकड़ों में काटें और उसके साथ एक छोटे बर्तन में जैतून का तेल गरम करें (सुनहरा किए बिना)।
5. ऑक्टोपस और आलुओं पर भरपूर लहसुन वाला तेल डालें और 220 °C पर ओवन में 10–15 मिनट रखें, जब तक टेंटेकल के किनारे सुनहरे न हो जाएँ।
6. कटा पार्सले और ताज़ी पिसी काली मिर्च छिड़ककर, ऊपर ट्रे का तेल डालकर परोसें।
सुझाव: „लागारेइरो” जैतून का तेल निकालने वाले कोल्हू का आदमी है: नाम बताता है कि इस व्यंजन में अच्छे तेल में कंजूसी नहीं की जाती। ऑक्टोपस का रस बचाकर रखें, यह सूप या चावल के व्यंजनों का बढ़िया आधार है।
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