1. कच्चे आम धोएँ और अच्छी तरह सुखाएँ: पानी अचार का दुश्मन है, इसलिए सारे बर्तन पूरी तरह सूखे होने चाहिए। छिलके और गुठली समेत लगभग 2 सेमी के टुकड़ों में काटें और गुठली का सख़्त हिस्सा फेंक दें।
2. एक कटोरे में आम के टुकड़ों को नमक और हल्दी के साथ मिलाएँ और एक दिन ढककर रखें। अगले दिन उनका छोड़ा पानी फेंक दें और टुकड़ों को एक साफ़ कपड़े पर 3–4 घंटे सूखने दें।
3. राई, मेथी दाना और सौंफ सूखे पैन में 1–2 मिनट भूनें, जब तक ख़ुशबू न आने लगे; फिर ठंडा होने दें और खरल में मोटा-मोटा कूटें।
4. एक बर्तन में सरसों का तेल धुआँ उठने तक गरम करें (इस तरह उसकी तेज़ी कम हो जाती है); फिर आँच से उतारें और गुनगुना होने दें। कलौंजी, हींग, लाल मिर्च पाउडर और कुटे मसाले मिलाएँ।
5. आम के टुकड़ों को मसालेदार तेल के साथ अच्छी तरह मिलाएँ और एक साफ़ और सूखे काँच के जार में इस तरह भरें कि तेल उन्हें ढक दे।
6. बंद करें और धूप वाली खिड़की पर 7–10 दिन पकने दें, दिन में एक बार हिलाते हुए। फिर यह फ़्रिज में महीनों चलता है; इसे हर भोजन में थोड़ी मात्रा में, चावल, दाल और पराठे के साथ परोसा जाता है।
सुझाव: भारत में लगभग हर परिवार की अचार की अपनी विधि होती है, जो गर्मियों में कच्चे आम के मौसम में बनाई जाती है। अगर सरसों का तेल न मिले, तो किसी सादे तेल से भी बना सकते हैं, पर तब विशिष्ट तीखा और तेज़ स्वाद हल्का हो जाता है।
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