1. दालचीनी की डंडियों को छोटे टुकड़ों में तोड़ें, बड़ी इलायची को हल्का कूटें और तेज पत्तों को मसल लें।
2. मोटे तले के सूखे पैन को मध्यम आँच पर गरम करें और साबुत धनिया और जीरा डालें। पैन को लगातार हिलाते हुए 1–2 मिनट भूनें, जब तक उनकी ख़ुशबू न आने लगे और वे थोड़े गहरे न हो जाएँ।
3. दालचीनी, बड़ी इलायची, लौंग, काली मिर्च और तेज पत्ता डालें और लगभग 1 मिनट और भूनें। ध्यान रखें कि जले नहीं: जला मसाला कड़वा हो जाता है।
4. मसालों को एक प्लेट में निकालें और पूरी तरह ठंडा होने दें।
5. मसाला या कॉफ़ी ग्राइंडर में बारीक पाउडर बनने तक पीसें और फिर पिसी इलायची और ताज़ा कद्दूकस किया जायफल मिलाएँ। छलनी से छानें और मोटे बचे हिस्से को दोबारा पीसें।
6. एक हवाबंद डिब्बे में, रोशनी से दूर रखें; इसकी पूरी ख़ुशबू 2–3 महीने बनी रहती है।
सुझाव: गरम मसाला का अर्थ है „गरम मसालों का मिश्रण”, और उत्तर भारत की लगभग हर करी इसकी एक चुटकी से पूरी होती है। ताज़ा भूनकर पीसा मसाला बाज़ार वाले से कहीं ज़्यादा ख़ुशबूदार होता है: इसे कम मात्रा में, पर बार-बार बनाना फ़ायदेमंद है।
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